कबीर के दोहे हमारी ज़िंदगी का हिस्सा हैं. हम इन दोहों को किताबों में तो पढ़ते ही हैं, साथ ही इनका इस्तेमाल समाज में कई लोगों को किसी जटिल बात को आसानी से समझाने के लिए करते हैं. कबीर के ये दोहे अपने अंदर ज़िंदगी के उन तमाम अनुभवों को समेटे हुए हैं. जिन्हें पाने के लिए आपको समाज की ठोकरें खाने के साथ-साथ कई किताबें भी पढ़नी पड़ती हैं. कबीर ने समाज को सुधारने और लोगों को धर्म का सही अर्थ समझाने के लिए अपने इन दोहों को गढ़ा था. इन 10 दोहों को पढ़ने के बाद आप कबीर को और जानना चाहेंगे.
1. पहले खुद को सुधारो
2. असली प्यार को पहचानों, दिखावा मत करो
3. अच्छी बातों को ग्रहण करो
4. ऊंच-नीच को छोड़कर व्यक्ति के व्यवहार को देखो
5. दूसरों का मज़ाक मत उड़ाओ
6. अपनी ज़ुबां पर थोड़ी लगाम रखिए
7. किसी भी चीज़ को ज्यादा करना नुकसानदेह होता है
8. जो आपकी कमियों को बताता है, वही सच्चा दोस्त होता है
9. न किसी से दोस्ती, न किसी से बैर
10. अपनी मेहनत करते रहिए
कबीर ने सही कहा है दोस्तों, अगर हम इन दोहों को अपने जीवन में उतार लें, तो जीना बहुत ही सरल हो जाएगा.
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